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मैत्रेय • अध्याय 2 • श्लोक 1
अथ भगवान्मैत्रेयः कैलासं जगाम तं गत्वोवाच भो भगवन्परमतत्त्वरहस्यमनुब्रूहीति । स होवाच महादेवः । देहो देवालयः प्रोक्तः स जीवः केवलः शिवः। त्यजेदज्ञाननिर्माल्यं सोऽहं- भावेन पूजयेत् ॥
एक बार भगवान् मैत्रेय कैलास पर्वत पर गये। वहाँ जाकर महादेव जी से उन्होंने कहा - 'हे भगवन्! मुझे परम तत्व का रहस्य बताने की कृपा करें।' महादेव जी ने कहा - 'शरीर देवालय है तथा उसमें रहने वाला जीव ही केवल शिव-परमात्मा है।' अतः अज्ञान रूप निर्माल्य को (पुरानी बासी माला की तरह से) छोड़ देना चाहिए तथा परमात्मा मैं ही हूँ, ऐसा समझकर ही उसकी पूजा करनी चाहिए।
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