आप ही मनु हैं, आप ही यम हैं; आप ही पृथ्वी हैं, और आप ही अच्युत हैं।
आप अपने स्वाभाविक स्वरूप में तथा सृष्टि के विविध प्रयोजनों के लिए, अनेक रूपों में स्थित होकर इस समस्त जगत् में विद्यमान हैं।
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