समाधिनिर्भूतमलस्य चेतसो निवेशितस्यात्मनि यत्सुखं लभेत्।
न शक्यते वर्णयितुं गिरा तदा स्वयं तदन्तःकरणेन गृह्यते॥
समाधि के द्वारा जिसके चित्त का मल(अशुद्धियाँ) नष्ट हो चुका हो, और जो आत्मा में पूर्णतः स्थित हो गया हो,
वह जिस सुख का अनुभव करता है, उसका वर्णन वाणी के द्वारा नहीं किया जा सकता।
उस समय वह परम आनन्द केवल अपने ही अन्तःकरण द्वारा प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया जाता है।
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