(हे भगवन्!)काम, क्रोध, लोभ, मोह, भय, विषाद, ईर्ष्या, प्रियवस्तु(पदार्थ) के वियोग तथा अप्रिय के मिलनजन्य दुःख, क्षुधा-पिपासा, जरा-मरण, शोक आदि से यह शरीर अत्यन्त परेशान रहता है, ऐसी स्थिति में कामनाओं, उपभोगों की क्या आवश्यकता?
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