किंवा दुःखमनुस्मृत्य भोगांस्त्यजति चोच्छ्रितान्। गर्भवासभयाद्भीतः शीतोष्णाभ्यां तथैव च ॥
अथवा गर्भवास के भय से ठंडी-गर्मी, सुख-दुःख आदि से भयभीत हुआ मनुष्य सांसारिक भोगों का त्याग क्यों करता है ?
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