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कुण्डीक • अध्याय 1 • श्लोक 3
संविभज्य सुतानर्थे ग्राम्यकामान्विसृज्य च। संचरन्वनमार्गेण शुचौ देशे परिभ्रमन् ॥
तदनन्तर अपने पुत्रों में धन को बाँट करके, ग्राम (गाँव-घर) से सम्बन्धित सभी कार्यों को पुत्रों को सौंप करके, पवित्र देश (क्षेत्र) में भ्रमण करते हुए वन के लिए प्रस्थान करना चाहिए।
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