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कुण्डीक • अध्याय 1 • श्लोक 25
निष्क्रियोऽस्म्यविकारोऽस्मि निष्कलोऽस्मि निराकृतिः। निर्विकल्पोऽस्मि नित्योऽस्मि निरालम्बोऽस्मि निर्द्वयः ॥
मैं तो निष्क्रिय, विकाररहित, निष्कल, आकृतिरहित, निर्विकल्प, अनित्य, निरालम्ब, अद्वैत, सर्वात्मा, सर्वातीत एवं द्वयरहित हूँ।
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