मैं (जीवात्मा)आकाश की भाँति कल्पना से परे हूँ, सूर्य के सदृश अन्य सुनहले आकर्षक पदार्थों से पृथक् हूँ, पर्वत की भाँति सदा स्थिर रहता हूँ तथा समुद्र की तरह अपार हूँ।
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