भिक्षादिवैदलं पात्रं स्नानद्रव्यमवारितम्। एवं वृत्तिमुपासीनो यतेन्द्रियो जपेत्सदा ॥
भिक्षा के लिए पात्र तथा स्नान आदि के लिए जल जिस किसी भी तरह से मिले, उसे प्राप्त करना चाहिए। इस प्रकार से अनुपम, श्रेष्ठ आचरण को स्वीकार करके यति को सदा ही जप करते रहना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुण्डीक के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।