पवित्रं स्त्रानशार्टी च उत्तरासङ्गमेव च। अतोऽतिरिक्तं यत्किंचित्सर्वं तद्वर्जयेद्यतिः ॥
—स्नान करने के लिए धोती एवं अंगौछा अपने पास रखना चाहिए।
इन वस्तुओं के अतिरिक्त अन्य सभी वस्तुओं का संन्यासी को परित्याग कर देना चाहिए।
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