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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 8
त्वया प्रियाप्रेमवशंवदेन शतं व्यतीये सुरतादृतूनाम् । रहः स्थितेन त्वदवीक्षणार्तो दैन्यं परं प्राप सुरैः सुरेन्द्रः ॥
आपके प्रिय प्रेम में लीन रहने से सैकड़ों ऋतुएँ बीत गईं; आपके दर्शन के अभाव में इन्द्र सहित देवता अत्यंत दुःखी हो गए।
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