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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 50
भयङ्करौ तौ विकटं नदन्तौ विलोक्य बाला भयविह्वलाङ्गी । सरागमुत्सङ्गमनङ्गशत्रोर्गाढं प्रसह्य स्वयमालिलिङ्ग ॥
उन दोनों के भयानक रूप और गर्जना को देखकर, भयभीत पार्वती ने प्रेम से शंकर को कसकर आलिंगन कर लिया।
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