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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 44
नभश्चरीमण्डनर्दपणश्रीः सुधानिधिर्मूर्धनि यस्य तिष्ठन् । अनर्थ्यचूडामणितामुपैति शैलाधिनाथस्य शिवालयस्य ॥
जिसके शिखर पर स्थित चन्द्रमा, जो आकाश का आभूषण है, उस शिवालय के लिए अनमोल चूड़ामणि के समान हो जाता है।
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