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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 43
निशासु यत्र प्रतिबिम्बितानि ताराकुलानि स्फटिकालयेषु । दृष्ट्वा रतान्तच्युततारहारयुक्ताभ्रमं बिभ्रति सिद्धवध्वः ॥
रात्रि में स्फटिक भवनों में तारों के प्रतिबिंब को देखकर सिद्ध स्त्रियाँ ऐसा भ्रम करती हैं मानो उनके गले के हार बिखर गए हों।
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