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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 42
यदीयभित्तौ प्रतिबिम्बिताङ्गमात्मानमालोक्य रुषा करीन्द्राः । मत्तान्यकुम्भिभ्रमतोऽतिभीमदन्ताभिघातव्यसनं वहन्ति ॥
जिसकी दीवारों में अपना प्रतिबिंब देखकर हाथी क्रोध में आकर अपने ही प्रतिबिंब पर प्रहार करते हुए अपने दाँतों को क्षति पहुँचा लेते हैं।
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