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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 36
यथागतं तान्विबुधान्विसृज्य प्रसाद्य मानक्रियया प्रतस्थे । स नन्दिना दत्तभुजोऽधिरुह्य वृषं वृषाङ्कः सह शैलपुत्र्या ॥
देवताओं को सम्मान देकर विदा कर, शंकर नन्दी के सहारे वृष पर चढ़कर शैलपुत्री के साथ प्रस्थान कर गए।
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