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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 31
अन्तः प्रविश्यावसरेऽथ तत्र स्रिग्धे वयस्ये विजया जया च । सुसम्पदोपाचरतां कलाना मङ्के स्थितां तां शशिखण्डमौलेः ॥
तब उस अवसर पर भीतर प्रवेश कर, स्नेहिल सखियाँ विजया और जया, शशिखण्डमौलि की गोद में बैठी हुई उसे विविध कलाओं से युक्त सेवा करने लगीं।
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