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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 30
नेपथ्यलक्ष्मीं दयितोपक्लृप्तां सस्मेरमादर्शतले विलोक्य । अर्मस्त सौभाग्यवतीषु धुर्य मात्मानमुद्धतविलक्षभावा ॥
अपने प्रिय द्वारा किए गए श्रृंगार को दर्पण में देखकर, वह मुस्कराते हुए अपने को सौभाग्यवती स्त्रियों में श्रेष्ठ मानकर कुछ लज्जित हुई।
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