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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 26
भालेक्षणाग्नौ स्वयमञ्जनं स भङ्गा दृशोः साधु निवेश्य तस्याः । नवोत्पलाक्ष्याः पुलकोपगूढे कण्ठे विनीलेऽङ्गुलिमुज्जघर्ष ॥
उसने उसके ललाट नेत्र की अग्नि से अंजन बनाकर उसकी आँखों में लगाया और नवकमल नेत्रों वाली के रोमांचित कंठ पर अपनी उँगलियाँ फिराईं।
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