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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 22
कपोलपाल्यां मृगनाभिचित्र पत्ररावलीमिन्दुमुखः सुमुख्याः । स्मरस्य सिद्धस्य जगद्विमोह मन्त्राक्षर श्रेणिमिवोल्लिलेख ॥
चन्द्रमुख शंकर ने सुमुखी के कपोलों पर मृगनाभि से चित्रित रेखाएँ बनाईं, जो कामदेव के जगत को मोहित करने वाले मंत्रों की पंक्ति के समान थीं।
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