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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 20
मन्देन खिन्नाङ्गुलिना करेण कम्मेण तस्या वदनारविन्दात् । परामृशन्धर्मजलं जहार हरः सहेलं व्यजनानिलेन ॥
हर ने धीरे-धीरे थकी हुई उँगलियों से, पंखे के समान वायु करते हुए, उसके मुखकमल से पसीने की बूँदों को सहज ही दूर कर दिया।
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