वह सुंदर रत्न के समान कान्तिमय शरीर वाला, कूजता हुआ, लाल नेत्रों को घुमाता हुआ, उठे और झुके हुए कंठ के साथ बार-बार अपनी सुंदर पूँछ फैलाता हुआ था।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।