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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 18
स पावकालोकरुषा विलक्षां स्मरत्रपास्मेरविनम्रवक्ताम् । विनोदयामास गिरीन्द्रपुत्री शृङ्गारगर्भर्मधुरैर्वचोभिः ॥
अग्नि के इस रूप को देखकर लज्जित और स्मितयुक्त पार्वती को शंकर ने मधुर, शृंगारपूर्ण वचनों से प्रसन्न किया।
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