मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 17
दक्षस्य शापेन शशी क्षयीव प्रुष्टो हिमेनेव सरोजकोशः । वहन्विरुपं वपुरुग्ररेतश्चयेन वह्निः किल निर्जगाम ॥
दक्ष के शाप से चन्द्रमा के क्षीण होने के समान, अग्नि भी उस उग्र वीर्य को धारण कर विकृत रूप में प्रकट हुआ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें