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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 16
त्वं सर्वभक्षी भव भीमकर्मा कुष्ठाभिभूतोऽनल धूमगर्भः । इत्थं शशापाद्रिसुता हुताशं रुष्टा रतानन्दसुखस्य भङ्गात् ॥
पार्वती ने रति के सुख में विघ्न होने से क्रोधित होकर अग्नि को शाप दिया—तू सर्वभक्षी, भयानक कर्म करने वाला और धूम से भरा हुआ हो जा।
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