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कुमारसंभवम् • अध्याय 9 • श्लोक 1
तथाविधेऽनङ्गरसप्रसङ्गे मुखारविन्दे मधुपः प्रियायाः । सम्भोगवेश्म प्रविशन्तमन्तर्ददर्श पारावतमेकमीशः ॥
ऐसे कामरस के प्रसंग में, जब प्रिय के मुखरूपी कमल पर मधुप के समान स्थित थे, तब ईश्वर ने अंतःपुर में प्रवेश करते हुए एक कबूतर को देखा।
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