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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 89
तेन भङ्गिविषमोत्तरच्छदं मध्यपिण्डितविसूत्रमेखलम् । निर्मलेऽपि शयनं निशात्यये नोज्झितं चरणरागलाञ्छितम् ॥
उसके कारण अस्त-व्यस्त चादर, ढीली मेखला और चरणों के रंग से युक्त शय्या, स्वच्छ होने पर भी रात के अंत तक नहीं छोड़ी गई।
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