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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 87
ऊरुमूलनखमार्गराजिभिस्तत्क्षणं हृतविलोचनो ह्रः । वाससः प्रशिथिलस्य संयमं कुर्वतीं प्रियतमामवारयत् ॥
उसने जंघा के पास नखों के चिह्नों से आकर्षित होकर, वस्त्र को सँभालती हुई प्रिय को रोक लिया।
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