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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 86
तौ क्षणं शिथिलितोपगूहनौ दम्पती चलितमानसोर्मयः । पद्मभेदपिशुनाः सिषेविरे गन्धमादनवनान्तमारुताः ॥
कुछ समय के लिए ढीले पड़े आलिंगन में, उन दोनों दंपति के चंचल मन को गन्धमादन वन के वायु ने स्पर्श किया, जो कमलों के भेदन की सुगंध लिए हुए था।
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