स व्यबुध्यत बुधस्तवोचितः शतकुम्भकमलाकरैः समम् । मूर्छनापरिगृहीतकैशिकैः किन्नरैरुषसि गीतमङ्गलः ॥
वह बुद्धिमान प्रभु, प्रातःकाल किन्नरों द्वारा गाए गए मंगल गीतों से, जो सौ कमलों के समान मधुर थे, जाग उठा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।