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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 83
क्लिष्टकेशमवलुप्तचन्दनं व्यत्ययार्पितनखं समत्सरम् । तस्य तच्छिदुरमेखलागुणं पार्वतीरतमभून्न तृप्तये ॥
उसके उलझे केश, मिटा हुआ चन्दन और नखों के चिह्नों से युक्त शरीर के साथ, पार्वती का प्रेम उसके लिए तृप्ति का कारण नहीं बन पाया।
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