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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 80
घूर्णमाननयनं स्खलत्कथं स्वेदिबिन्दुमदकारणस्मितम् । आननेन न तु तावदीश्वरश्चक्षुषा चिरमुमामुखं पपौ ॥
उसके घूमते हुए नेत्र, लड़खड़ाती वाणी, पसीने की बूँदें और मदजनित मुस्कान को देखकर, ईश्वर ने उसके मुख का रस नेत्रों से ही लंबे समय तक पान किया।
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