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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 79
तत्क्षणं विपरिवर्तितहियोर्नेष्यतोः शयन मिद्धरागयोः । सा बभूव वशवर्तिनी द्वयोः शूलिनः सुवदना मदस्य च ॥
उस क्षण, राग से भरे हुए दोनों के मन परिवर्तित होकर शयन की ओर अग्रसर हुए, और वह सुन्दर मुख वाली शूलधारी तथा मद दोनों के वश में हो गई।
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