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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 77
मान्यभक्तिरथवा सखीजनः सेव्यतामिदमनङ्गदीपनम् । इत्युदारमभिधाय शङ्करस्तामपाययत पानमम्बिकाम् ॥
“यह कामोद्दीपक पेय है, चाहे आदरपूर्वक या सखियों के साथ इसका सेवन करो,” ऐसा कहकर शंकर ने अम्बिका को वह पेय पिलाया।
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