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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 74
पाकभिन्नशरकाण्डगौरयोरुल्लसम्प्रतिकृतिप्रसन्नयोः । रोहतीव तव गण्डलेखयोश्चन्द्रबिम्बनिहिताक्ष्णि चन्द्रिका ॥
तुम्हारे गालों की रेखाओं पर, जो पके हुए गन्ने की तरह गौर और प्रसन्न हैं, चन्द्रमा की किरणें ऐसे चढ़ती प्रतीत होती हैं मानो उनमें उग रही हों।
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