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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 73
एष चारुमुखि योगतारया युज्यते तरलबिम्बया शशी । साध्वसादुपगतप्रकम्पया कन्ययेव नवदीक्षया वरः ॥
हे सुन्दर मुख वाली, यह चन्द्रमा योगतारा के साथ ऐसे जुड़ा हुआ है जैसे नवविवाहिता कन्या भय से कम्पित होकर वर के साथ जुड़ती है।
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