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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 72
शक्यमङ्गुलिभिरुद्धृतैरधः शाखिनां पतितपुष्पपेशलैः । पत्रजर्जरशशिप्रभालवैरेभिरुत्कचयितुं तवालकान् ॥
वृक्षों से गिरे हुए कोमल पुष्पों और चन्द्रप्रभा से युक्त पत्तों से तुम्हारे केशों को उँगलियों से सजा कर सुंदर बनाया जा सकता है।
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