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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 7
शूलिनः करतलद्वयेन सा सन्निरुध्य नयने हृतांशुका । तस्य पश्यति ललाटलोचने मोघयत्नविधुरा रहस्यभूत् ॥
उसने अपने वस्त्र से ढके नेत्रों को शूलधारी के हाथों से रोकते हुए भी, उसके ललाट नेत्र को देख लिया, और उसका यह प्रयत्न व्यर्थ हो गया।
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