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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 67
चन्द्रपादजनितप्रवृत्तिभिश्चन्द्रकान्तजलबिन्दुभिर्गिरिः । मेखलातरुषु निद्रितानमून्बोधयत्यसमये शिखण्डिनः ॥
चन्द्रकान्त मणि से उत्पन्न जल बिंदुओं के प्रभाव से पर्वत अपने वृक्षों पर सोए हुए मोरों को असमय जगा देता है।
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