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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 61
पश्य पक्तफलिनीफलत्विषा बिम्बलाञ्छितवियत्सरोऽम्भसा । विप्रकृष्टविवरं हिमांशुना चक्रवाकमिथुनं विडम्ब्यते ॥
देखो, पके हुए फलों की आभा से युक्त आकाशरूपी जल में चन्द्रमा का प्रतिबिंब ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो दूर स्थित चक्रवाक युगल का उपहास कर रहा हो।
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