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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 55
यामिनीदिवससन्धिसम्भवे तेजसि व्यवहिते सुमेरुणा । एतदन्धतमसं निरङ्कुशं दिक्षु दीर्घनयने विजृम्भते ॥
रात्रि और दिन की संधि के समय, जब सुमेरु द्वारा प्रकाश रुक जाता है, तब यह अंधकार चारों दिशाओं में फैलकर प्रकट हो जाता है।
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