संध्या के बाद शेष बची लालिमा को पश्चिम दिशा धारण कर रही है, जो रक्त से रंजित पृथ्वी के समान प्रतीत होती है, मानो सूर्य का अग्रभाग तिरछा गिरा हो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुमारसंभवम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुमारसंभवम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।