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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 47
अद्रिराजतनये तपस्विनः पावनाम्बुविहिताञ्जलिक्रियाः । ब्रह्म गूढमभिसन्ध्यमादृताः शुद्धये विधिविदो गृणन्त्यमी ॥
हे पर्वतराज की पुत्री, तपस्वी लोग पवित्र जल से अंजलि अर्पित कर संध्या के समय गूढ़ ब्रह्म का ध्यान करते हुए शुद्धि के लिए उसका जप करते हैं।
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