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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 38
आविशद्भिरुटजाङ्गणं मृगैर्मूलसेकसरसैश्च वृक्षकैः । आश्रमाः प्रविशदग्निधेनवो विभ्रति श्रियमुदीरिताग्नयः ॥
मृग आश्रम के आँगन में प्रवेश कर रहे हैं और जल से सिंचित वृक्ष हरे-भरे हैं; अग्निहोत्र से युक्त आश्रम दिव्य शोभा धारण कर रहे हैं।
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