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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 36
एष वृक्षशिखरे कृतास्पदो जातरूपरसगौरमण्डलः । हीयमानमहरत्ययातपं पीवरोरु पिबतीव बर्हिणः ॥
यह वृक्ष के शिखर पर स्थित स्वर्णमय आभा वाला सूर्य, दिन के घटते ताप को मानो पीता हुआ प्रतीत हो रहा है।
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