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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 34
पश्य पश्चिमदिगन्तलम्बिना निर्मितं मितकथे विवस्वता । दीर्घया प्रतिमया सरोऽम्भसां तापनीयमिव सेतुबन्धनम् ॥
देखो, पश्चिम दिशा में झुके हुए सूर्य ने अपनी लंबी छाया से जलाशयों पर मानो स्वर्ण से बना हुआ एक पुल सा निर्मित कर दिया है।
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