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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 31
सीकरव्यतिकरं मरीचिभिर्दूरयत्यवनते विवस्वति । इन्द्रचापपरिवेषशून्यतां निर्झरास्तव पितुर्ब्रजन्त्यमी ॥
जब सूर्य अस्त होने को झुकता है, तब उसकी किरणें जलकणों को दूर कर देती हैं और तेरे पिता के ये निर्झर इन्द्रधनुष के आभूषण से रहित हो जाते हैं।
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