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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 30
पद्मकान्तिमरुणत्रिभागयोः सङ्कमय्य तव नेत्रयोरिव । सङ्घये जगदिव प्रजेश्वरः संहरत्यहरसावहर्पतिः ॥
तेरे नेत्रों की लालिमा और कमल जैसी कान्ति के संगम के समान, यह सूर्य दिन के अंत में संसार को समेटकर संहार करता प्रतीत होता है।
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