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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 28
इत्यभीममनुभ्य शङ्करः पार्थिवं च दयितासखः सुखम् । लोहितायति कदाचिदातपे गन्धमादनगिरि व्यगाहत ॥
इस प्रकार अनेक दिव्य और सांसारिक सुखों का अनुभव करते हुए, प्रिय के साथ शंकर कभी-कभी गंधमादन पर्वत में भी गए।
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