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कुमारसंभवम् • अध्याय 8 • श्लोक 27
तां पुलोमतनयालकोचितैः पारिजातकुसुमैः प्रसाधयन् । नन्दने चिरमयुग्मलोचनः सस्पृहं सुरवधूभिरीक्षितः ॥
उसे पुलोम की पुत्री के योग्य पारिजात पुष्पों से सुसज्जित करते हुए, नन्दनवन में देवांगनाओं द्वारा वह दीर्घकाल तक स्पृहापूर्वक देखा जाता रहा।
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